सुप्रीम जजेज़ का सुप्रीम काम: रिटायरमेंट के बाद करो आराम | Neeraj Mishraa
सुप्रीम जजेज़ का सुप्रीम काम: रिटायरमेंट के बाद करो आराम
18-Feb-2023

सुप्रीम कोर्ट में कुछ ऐसा हो रहा है, जिसे लोग शर्मनाक कह रहें हैं। चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया राष्ट्रपति को शपथ दिलाता है और चीफ जस्टिस रह चुके न्याय मूर्ति जब गवर्नर बन जाते हैं तो उन्हें हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस शपथ दिलाता है। सता शिवम् चीफ जस्टिस रहने के बाद केरला के गवर्नर बन गए थे तो उनके बारे में काफी ट्रोलिंग हुई थी। इसके बाद रंजन गोगोई CJI रहने के बाद राज्य सभा के मनोनीत सदस्य बन गये। तो उनकी और भी ज्यादा ट्रोलिंग हुई। अब नजीर रिटायरमेंट के 40 दिन के अंदर आंध्र के गवर्नर बन गये हैं। आखिर ये जजेस ऐसा क्या करते हैं कि इन्हें ये नये पॉलिटिकल Appointments दिये जाते हैं ? जस्टिस नजीर उस पांच मेंबर बेंच का हिस्सा थे जिसने राम मंदिर का निर्णय दिया था। उसमे से रंजन गोगोई और S .A . बोबडे चीफ जस्टिस बन गये, चंद्रचूड़ अभी चीफ जस्टिस हैं। और नजीर अब गवर्नर बन गये हैं। 5वें थे जस्टिस अशोक भूषण जो अब NCLAT के अध्यक्ष हैं। तो क्या ये समझा जाये कि ये लेना-देना टॉप लेवल पर चलता रहता है ? क्या फेवरेबल जजमेंट देकर पद तय किये जाते हैं ? आज कम से कम देश में 100 पद ऐसे हैं जो सिर्फ रिटायर्ड जजेस के लिए रिजर्व हैं। ताकि इनका ताना-बाना, सुख-चैन रिटायरमेंट के बाद भी बना रहें। जब एक अच्छा वकील जज बनाया जाता हैं तो क्या उसे NCLAT का अध्यक्ष या लोकायुक्त नहीं बनाया जा सकता ? इसके लिए रिटायर्ड जज होना क्यों जरूरी है। 65 कि उम्र में रिटायरमेंट इसलिए किया जाता है कि शरीर और दिमाग को आराम कि जरूरत है। रिटायर्ड जजों से निवेदन है कि सरकारी खर्च पर अस्पताल का बिल न बढ़ायें बल्कि 50-55 बरस के वकीलों को इन 100 पदों पर बैठने का मौका दें। एक 50 वर्षीय अनुभवी वकील लोकायुक्त के रूप में समाज को ज्यादा सेवा दे सकता है ना कि 65 वर्षीय रिटायर्ड जज। तो वकीलों आगे आओ और ये जायज मांग उठाओ। जजेस को रिटायरमेंट के बाद न प्रैक्टिस करनी चाहिये न किसी पद पर बैठना चाहिये। समाज सेवा किसी पद का मोहता https://www.youtube.com/channel/UCrqf04Yx0wkYs4NCW1rnEoA

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